मधुबनी – लदनियां /बूझने का नाम नहीं ले रही सब्जियों में लगी आग

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज

 अमरनाथ यादव की रिपोर्ट

सब्जियों की बढ़ती मंहगाई ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दाल-सब्जी में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। इस आग के कारण लोगों की थालियों से दाल-सब्जी छिनती चली जा रही है। सम्प्रति 50 फीसदी ऐसे लोग हैं, जिनकी थालियों में सब्जी के दर्शन दुर्लभ हो रहे हैं। 30 प्रतिशत लोगों की थालियों में दाल है तो सब्जी नहीं, सब्जी है तो दाल नहीं। शेष 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनके किचेन की मीनू में कमी आने के बावजूद भी थालियों में चावल का साथ सब्जी व दाल भी दे रही है। घटते रोजगार के बीच मंहगाई की यही स्थिति रही तो इनकी थालियों से भी दाल-सब्जी छिन जाएगी। वैसे दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं की कीमत में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है।
कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के कारण अधिकांश लोगों के रोजगार छिन गये हैं, जिससे लोगों की क्रयशक्ति घटती चली गई है। जबकि खाद्य पदार्थों के दाम निरन्तर अपने पिछले सारे रिकॉर्ड को तोड़ने पर तुले हैं।
प्याज का दाम रूला रहा है, तो आलू भूलने को विवश कर रहा है।तेलहन व दलहन की खरीद करना आम लोगों की पहुंच से दूर होता चला जा रहा है। सब्जियां न्यूनतम 40 व अधिकतम 100 रूपये के बीच बिक रही हैं। कुल मिलाकर आम लोग जहां मंहगाई की चक्की में पिस रहे हैं, वहीं प्रशासन के लिए सब्जियों की बढ़ती मंहगाई अनसूलझी पहेली बनकर रह गई है। लाइलाज होती इस मंहगाई का क्या हश्र होगा, भगवान जाने।

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