स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आते ही पूर्व सैनिक की राष्ट्रभक्ति कविता चर्चा में

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज

रिपोर्ट – सुभाष सिंह यादव

स्वतंत्रता दिवस के निकट आते ही सम्पूर्ण भारतवर्ष राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत हो जाता है, राष्ट्रभक्ति रचनाओं का स्वर सुनाई देने लगता है। हर राष्ट्रप्रेमी अपने तरह से इस उल्लास का हिस्सा बनते हैं और राष्ट्रीय भावनाओं को प्रदर्शित करते हैं। राष्ट्रवादी साहित्य और राष्ट्रवादी विचारों स्वतः प्रस्फुटित होने लगता है। इसी कड़ी में एक राष्ट्रभक्ति कविता चर्चा में है और इसके रचयिता एक पूर्व सैनिक हैं। अभी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व गुजरा है और 492 वर्षों के संघर्ष के पश्चात शौर्य का अप्रतिम उदाहरण श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ है। तो स्वाभाविक है कि आम जनमानस में धार्मिक और राष्ट्रीय भावनाओं का संचार हो रहा है। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना में सूबेदार रहे प्रो. कृष्णदेव सिंह की रचना “ईष्ट शक्ति से राष्ट्रभक्ति की ओर” चर्चा में है और चहुँओर इसका पाठ हो रहा है।

सेना में सूबेदार रह चुके प्रो. कृष्णदेव सिंह मधुबनी जिला के जयनगर अनुमण्डल अंतर्गत जयनगर बस्ती पंचायत के फरदाही टोल के रहने वाले हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के नासिक में फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में सेवा दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे दशकों से साहित्यिक साधना में भी लीन रहे हैं और भारतीय सेना में रहते हुए भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, कविता, लघुकथा इत्यादि भेजते रहे हैं और प्रकाशित होता रहा है। इनकी रचनाओं का संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है और वे कॉलेज मैगजीन(महाविद्यालय पत्रिका) के सम्पादक भी हैं।
आगे पढ़िये सेवानिवृत्त सूबेदार (प्रोफेसर) कृष्णदेव सिंह की रचना:-

                    ईष्ट शक्ति से राष्ट्रभक्ति की ओर

हम सबके मन से कृष्ण भक्ति का रंग उतरा नहीं,
अपनी आजादी का रंग अब सर पर चढ़ने लगा है।
पावन गीता का ज्ञान है कि भारत कर्म प्रधान है,
कर्म के साथ, राष्ट्रभक्ति तापमान बढ़ने लगा है।
अब स्वतंत्रता दिवस आनेवाला है, दो दिनों बाद,
मन हम सबका, नया नया सपना गढ़ने लगा है।
अध्यात्म से आजादी का बड़ा गहरा संबंध रहा,
हर भारतवासी जश्न हेतु कुछ कुछ करने लगा है।
भगवान कृष्ण को भी खाली मंदिर बड़ा बुरा लगा,
उनकी कृपा का असर होगा, कोरोना डरने लगा है।
बांधे हुए कर्म धर्म की डोर, चलें आजादी की ओर,
सुबह से ही दिल हमारा, तिरंगा पे लगने लगा है।
वतन,गगन चमन, पवन, तन, मन सारे आजाद हैं,
इंतजार हमारा अब, तेज रफ्तार पकड़ने लगा है।
हर भारतीय गाना चाहता है आजादी का गाना,
मुखड़े पर भाव आजादी का खूब निखरने लगा है।

“ जय श्रीकृष्ण, जय भारत, जय तिरंगा”

:- सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह

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