दरभंगा – हास्य-व्यंग्य की फुलझड़ियों संग अनेक विषयों पर मुखर हुए कविता के स्वर

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ब्यूरो – अजित कुमार सिंह 

दरभंगा / विद्यापति  सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित मिथिला विभूति पर्व समारोह के दूसरे दिन के कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र की समाप्ति उपरांत भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कवि मणिकांत झा के संचालन में देर रात शुरू हुए इस कवि सम्मेलन में समसामयिक विषयों के साथ ही राष्ट्रभक्ति, नारीशक्ति व प्रेम के स्वर कविताओं में मुखर होते रहे। वहीं हास्य-व्यंग्य की फुलझड़ियां भी बीच-बीच में छुटती रही।
47 वें मिथिला विभूति पर्व समारोह में मिथिला विभूति सम्मान से सम्मानित कवि फूलचंद्र झा ‘प्रवीण’ ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत अपनी कविता ‘राष्ट्रहित में एकता दीप जड़ाबय परतै…’ प्रस्तुत कर जहां वातावरण में देशभक्ति का भाव जगाने में कामयाब रहे। वहीं दिल्ली से आई कवयित्री आभा झा की नारीशक्ति के उन्नयन व प्रेम पर आधारित रचनाएं श्रोताओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। नारी शक्ति के उन्नयन पर केंद्रित उनकी कविता ‘बिना बातक बुझौअली, मारि झटका कते के खसाबी अहाँ…’ ने श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरी। दीप नारायण विद्यार्थी ने मनुष्य की जिंदगी में बनते बिगड़ते संबंधों पर आधारित कविता ‘की की ने हमरा करेलक ई जिनगी, ओंगरी पर सदिखन नचेलक ई जिनगी…’ प्रस्तुत कर समा बांध दिया। साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘डाॅ इंद्रकांत झा साहित्य सेवी सम्मान’ से नवाजे गए कवि कथाकार रमेश ने ‘लोहक मनुक्ख’ शीर्षक कविता प्रस्तुत कर वर्तमान संदर्भ को बखूबी रेखांकित करने में कामयाबी हासिल की। डॉ महेंद्र नारायण राम ने ‘ईमानदार’ शीर्षक कविता पढ़ी। जबकि नवोदित कवि मेघानंद झा ने अपनी रचना ‘सासुरक मंत्र’ कविता के जरिए हास्य व्यंग्य की चासनी में गंभीर विचारों को श्रोताओं के समक्ष रखा।

मैथिली साहित्य क्षेत्र में हास्य व्यंग्य के शीर्षस्थ स्तंभ डॉ जयप्रकाश चौधरी जनक ने अपनी कविता ‘ब्रह्मा विष्णु महेश बूढेला, तीनू गोटे आब देथु रिजाईन…’ एवं ‘तोहर की हेतौ रौ बन्देसरा…’ की प्रस्तुति के साथ लोगों को गुदगुदाने में कामयाब रहे। वहीं डॉ चंद्रमणि झा ‘अहां चली सबकियो चली, जाहि बाट पर ईजोत ताहि पर चली…’ प्रस्तुत कर सामाजिक जागरूकता के स्वर गढ़े। दिनेश झा की कविता ‘कर्जा में एना रौ बौआ कते दिन रहमें…’ जहां दर्शकों को काफी पसंद आया। वहीं कौशलेश चौधरी की कविता ‘कनिया कनिये, सौस सिमरिया, बौआ बम्बे एम्हर के…’ ने मिथिला के गांव के पुरूष विहीन वर्तमान परिदृश्य को इंगित किया। मैथिल प्रशांत ने अपनी ग़ज़ल की प्रस्तुति दी। जबकि समस्तीपुर से आए अमित मिश्र ने अपनी कविता के माध्यम से समां बांधने में कामयाबी हासिल की। इनके अतिरिक्त प्रवीण कुमार, शंभुनाथ मिश्र, चन्द्रमोहन झा पड़वा, सीताराम मिश्र, गुणानन्द झा, राम प्रमोद चौधरी, शत्रुघ्न सहयात्री आदि की रचनाओं को भी श्रोताओं ने पसंद किया।वरिष्ठ कवि उदय चंद्र झा ‘विनोद’ की अध्यक्षता में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में दिल्ली से आई कवयित्री आभा झा रचित कविता संग्रह ‘प्रथम प्रणय’ का विमोचन भी किया गया। विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा प्रकाशित इस कविता संग्रह में भक्ति, प्रेम, नारी चेतना व हास्य-व्यंग्य सहित अनेक विषयों पर केंद्रित कुल 65 कविताओं को संकलित किया गया है। मध्य रात्रि में कवि सम्मेलन की समाप्ति उपरांत मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महेंद्र महान के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में नीरज कुमार झा, दीपक कुमार झा, सृष्टि, श्रुति, अनुष्का, साक्षी, कंचन, गौरंग चौधरी, गुड्डू कुमार, संत कुमार झा, सुदर्शन चौधरी आदि ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। तबला पर सुधीर कुमार मिश्र, पंडित रमेश मलिक, हीरा कुमार झा, शंकर साहू, नाल पर सुधांशु, कमलेश, अवधेश व गोपाल, कैसियो पर इंद्रकांत झा, ढोलक पर मुरारी एवं बैंजो पर शिव कुमार ने अपनी संगति दी ।

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