दरभंगा – दीक्षांत परिधान में पाग-चादर शामिल होने पर एमएसयू ने निकाला पाग शोभा यात्रा :मिथिला स्टूडेंट स्टूडेंट।। 2.दरभंगा छात्र सेना दरभंगा जिला की बैठक जिला अध्यक्ष प्रेम सिंघानिया के अध्यक्षता में विश्वविद्यालय परिसर में हुआ ।। 3.दरभंगा जीवन रक्षा के लिए जरूरी है जल प्रबंधन जल प्रबंधन आ मिथिला’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज

ब्यूरो — अजित कुमार सिंह

दरभंगा /दीक्षांत परिधान में पाग-चादर शामिल होने पर एमएसयू ने निकाला पाग शोभा यात्रा मिथिला स्टूडेंट स्टूडेंट के विश्वविद्यालय इकाई के सदस्य दिवाकर मिश्रा के नेतृत्व में दीक्षांत समारोह के परिधान में पाग-चादर शामिल होने पर एमएलएसएम कॉलेज से पाग शोभा यात्रा विश्वविद्यालय के लिए निकाला गया ।एमएसयू के विश्वविद्यालय अध्यक्ष अमन सक्सेना ने कहा कल वो दिन आने वाला है। जिसका इंतजार कई वर्षो से किया जा रहा है। कल का दिन मिथिलांचल के कोने कोने में एक स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जायेगा आदि काल से मिथिला की सांस्कृतिक पहचान पाग चादर को वो सम्मान मिला है जिसको वर्षो से अवहेलना किया जा रहा था पिछले तीन वर्षो से संगठन पाग चादर को दीक्षांत का परिधान बनाने के लिए संघर्ष करती आ रही है।  जिस संघर्ष का नतीजा आज सबके सामने है हमने अनसन किया,हमने पदाधिकारियों का विरोध किया, पुतला दहन किया,सद्बुद्धि यज्ञ किया,पुलिस की लाठिया खाई, पिछले दीक्षांत की बात करें तो हमारे तीन साथी लगातार चार दिनों तक भूख हड़ताल पे रहे। जाकर पाग चादर को दीक्षांत के परिधान में शामिल किया गया है कल का दिन बेहद ही खास है हमारे लिए भी और यहाँ के लोगो के लिए भी संघर्ष जितना बड़ा था जश्न उतना ही बड़ा मनाया जा रहा है ।पूर्व में विश्वविद्यालय के तमाम पदाधिकारियों का संगठन के द्वारा सम्मान भी किया गया है और जश्न मनाया जा रहा हैं संगठन मंत्री अभिषेक कुमार झा ने कहा पाग शोभा यात्रा दिन के 11.30 बजे एमएलएसएम कॉलेज से सेकड़ो की तादाद में छात्र-छात्राये सर पे पाग धारण करके नारेबाजी करते हुए विश्वविद्यालय के लिए निकले हमारा उद्देश्य लोगो को जागरूक करना है  अपनी संस्कृति, परंपरा के प्रति लोगो को जागरूक करना है ।यह ख़ुशी का माहौल है जिसे हम कितने संघर्षो के बाद हासिल किये है। विश्वविद्यालय के पदाधिकारीयों का धन्यवाद करते है हम धन्यवाद करते है तमाम सीनेट सिंडिकेट के सदस्यों का तमाम प्रधानाचार्य का तमाम प्रोफेसरो को तमाम पत्रकार गण का तमाम कार्यकर्ता का जिन्होंने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हमारा साथी दिया मुख्य प्रवक्ता जय प्रकाश झा ने कहा वर्षो की मेहनत का नतीजा है की पाग चादर को दीक्षांत के परिधान में शामिल कर लिया गया है। हमारे हजारों कार्यकर्ता की मेहनत आज रंग लायी है लगभग 50 के करीब में ज्ञापन विश्वविद्यालय को सौंपा गया था विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत से लेकर कॉलेज में होने वाले दीक्षांत तक इसका विरोध किया गया लगातर दो दीक्षांत समारोह हमारे विरोध का गवाह रहा है ,अनसन के समय कुलाधिपति कार्यालय से आए हुए पदाघिकारी को दीक्षांत परिधान में पाग चादर को शामिल करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया था।  जाकर हमारे सफल आंदोलन की एक नीव परी थी। जिसका नतीजा इस बार दीक्षांत समारोह में देखने को मिलेगा कल का दिन मिथिला विश्वविद्यालय के लिए बेहद ही खास है जिसका इंतजार हमलोग कई वर्षो से कर रहे थे ।इस लोकतान्त्रिक देश में अपनी बातो को रखने का एक मात्र जरिया आंदोलन हैं जिस लोकतंत्र का मिथिला स्टूडेंट यूनियन सम्मान करती हैं हम लोकतान्त्रिक तरीके से ही इस आंदोलन को किये और जीत भी हासिल किये,
दिवाकर मिश्रा ने कहा यहाँ के युवा अब जागरूक हो चुके है अपनी संस्कृति को बचाने के लिए युवा आगे आ रहे है जो आने वाले समय के लिए एक बहुत ही अच्छा सन्देश है की युवा अपनी संस्कृति और परम्परा को बचाने के लिए आगे आ रहे है , मुकुंद चौधरी,करण शास्त्री, ऋषि कुमार,उज्जवल मिश्रा,नीरज झा,अंगद कुमार, रवि गुप्ता,गौरव झा,अंजित चौधरी,गोपाल चौधरी, विद्याभूषण राय आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये
मौके पर रोहित,आशीष,अर्जुन सिंह, अंकित गुप्ता, शिवांगी कुमारी,पूजा कुमारी, सागर झा, विक्की कुमार,अनीश चौधरी,केशव मैथिल, प्रखर, शैलेश, ज्योति झा,सरिता, सुप्रिया,मानशि,मुलयाम,कुणाल,विकाश,रंजन भगत समेत सेकड़ो कार्यकर्ता मौजूद थे।

 

दरभंगा / छात्र सेना दरभंगा जिला की बैठक जिला अध्यक्ष प्रेम सिंघानिया के अध्यक्षता में विश्वविद्यालय परिसर में हुआ

 

दरभंगा /प्रखंड कमिटी जल्द से जल्द तैयार करने,संगठन की ओर से जिला स्तरीय क्विज प्रतियोगिता कराए जाने आदि को लेकर चर्चा हुई ।बैठक में पूर्व छात्र नेता और प्रगतिशील जनसंघर्ष मोर्चा के संरक्षक डॉ सुमन कुमार झा ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्र नेता विहीन हो चुकी है ।सभी सत्ता के गोद में जाकर बैठ चुके है ।इसी को लेकर छात्र छात्राओं के मुद्दों के अपनी आवाज़ बनाने वाले संगठन का निर्माण किया गया है ।उन्होंने कहा की संगठन सभी कॉलेजों में अपना उम्मीदवार उतारेगी ।जिससे छात्रों को एक नया विकल्प मिल सकें।परिषद सदस्य राहुल राज ने कहा की बिहार और बिहारियों का संगठन है छात्र सेना ।वर्षों से बिहार और बिहार के लोगों के साथ हर स्तर पर पूरे देश में भेदभाव किया जाता रहा है लेकिन आज तक किसी ने इसको लेकर आवाज़ उठाने का काम नहीं किया । छात्र सेना बिहार के हर एक छात्र ,समाज के हर एक वर्ग के लोगों का आवाज़ बनने का काम करेगा ।बिहार के लोगों के साथ अलग अलग राज्यों में हो रहे भेदभाव के खिलाफ संगठन जल्द ही अपना कैंपेन शुरू करेगा।संगठन का लक्ष्य अगले दो साल में बिहार के सभी जिलों ,प्रखंडों में खुद को खड़ा करना है। छात्र नेता चंद्रभूषण झा ने अधिक से अधिक छात्रों को संगठन से जोड़ने के ऊपर विस्तारपूर्वक अपनी बात रखी। छात्र नेता अनुराग सिंह गौतम ने कहा की पूरे बिहार के छात्रों को एक ऐसे संगठन की तलाश थी जो उनके लिए उनके मुद्दे पर लड़ें लेकिन एक भी संगठन इस पर खड़ा नहीं उतर पाए जिसके कारण आज पूरे बिहार के छात्रों को नया विकल्प देने के लिए संगठन का निर्माण किया गया है ।बैठक में वरिष्ठ छात्र नेता अमित कुमार झा ने कहा कि अगले तीन दिनों के अंदर छात्रसंघ चुनाव के मद्देनजर सभी कॉलेजों के प्रभारी की घोषणा कर दी जाएगी ।बैठक में मगन कुमार पासवान,अरुण कुमार, ओमराज, कृष्णा कुमार पासवान ,सुजीत कुमार पासवान,ज्ञान प्रकाश ,प्रशांत रॉय ,संजीव कुमार ,दीपक कुमार सहित दर्जनों छात्र मौजूद थे।

दरभंगा- जीवन रक्षा के लिए जरूरी है जल प्रबंधन
जल प्रबंधन आ मिथिला’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी 

दरभंगा /जीवन रक्षा के लिए जरूरी है जल प्रबंधन
जल प्रबंधन आ मिथिला’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उपजे कई सवाल, मिले अनेक समाधान धड़ल्ले से हो रही वृक्षों की कटाई और जल संसाधन के पारंपरिक स्रोतों के संरक्षण में प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर हो रही अनदेखी के कारण जल संकट राष्ट्रीय स्तर पर भयावह रूप लेता जा रहा है और पग-पग पोखर की संस्कृति के लिए विश्वविख्यात मिथिला क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है। उक्त बातें तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोह के दूसरे दिन सोमवार को जल प्रबंधन मिथिला विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में राजनीति विज्ञान के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ जितेंद्र नारायण ने कही।संगोष्ठी के संयोजक मणिकांत झा के संचालन में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता एमएलएसएम कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ विद्या नाथ झा ने की। जबकि महापौर वैजयंती देवी खेड़िया एवं विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने आगत अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया।उद्घाटन भाषण में महापौर श्रीमती खेड़िया ने विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा इस ज्वलंत विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किए जाने को उपयोगी और समयानुकूल बताते हुए संस्थान परिवार से सेमिनार में छनकर आनेवाले विचारों से नगर निगम को अवगत कराने का आग्रह किया। ताकि वह उसका अनुपालन कर जल संरक्षण के बेहतर निदान खोजने में सफल हो सकें ।अपने संबोधन में उन्होंने निगम द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी विस्तार से चर्चा की ।
विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने मिथिला क्षेत्र के पारंपरिक जल संरक्षण स्रोतों की विस्तार से चर्चा करते हुए इसके संरक्षण के लिए प्रशासन और समाज के लोगों को एक साथ कदम से कदम मिलाकर संकट का निदान खोजने की अपील की । अपने संबोधन में उन्होंने इस बात का खासतौर पर जिक्र किया कि किस प्रकार मिथिला के पुरातन समाज ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षों को धर्म से जोड़ कर इसके अस्तित्व की रक्षा के लिए कदम उठाए। उन्होंने पुरखों के बनाए नियमों के उल्लंघन पर चिंता जाहिर की।डीएमसीएच के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ओमप्रकाश ने जल प्रबंधन के चिकित्सकीय कारकों की विस्तार से चर्चा करते हुए जल बचत के अनेक उपाय सुझाए। वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने मानव जीवन में जल के महत्व की चर्चा करते हुए समुचित जल प्रबंधन के लिए भौतिकवादी एवं सुख-सुविधावादी सोच से परहेज करने की सलाह दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ विद्या नाथ झा ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मिथिला क्षेत्र में अनावृष्टि एवं अतिवृष्टि एक नई समस्या बनकर सामने आई है जिसके कारण वह कभी बाढ़ तो कभी सुखार का दंश झेलने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने मिथिला के जल प्रबंधन की बदहाल स्थिति के लिए बांधों के निर्माण को महत्वपूर्ण बताते हुए जल को बांधने की नीति पर पुनर्विचार किए जाने को समय की जरूरत बताया।संगोष्ठी के लिए प्राप्त सभी आलेखों को पुस्तक आकार में कर कार्यक्रम में विमोचन किया गया। संगोष्ठी के लिए प्राप्त कुल 30 आलेखों में से करीब दो दर्जन आलेखों का वाचन प्रतिभागियों द्वारा किया गया। आलेख के माध्यम से पंडित विष्णु देव झा विकल ने जहां जल के मायके के रूप में मिला को इंगित किया । वहीं डॉ महेंद्र नारायण राम ने मिथिला के धार्मिक कार्यों में इसके संरक्षण के लिए निहित लोकाचारों की ओर ध्यान खींचा। डॉ सत्येन्द्र कुमार झा ने जल संरक्षण पर स्वरचित कविता पढी तो सुधीर कुमार ने निरंतर प्रयास को जल संसाधन के संरक्षण के लिए जरूरी बताया। नीलम झा ने मिथिला की परंपरा में निहित समाधानों की विस्तार से चर्चा की। आभा झा ने जल संकट से उबरने के उपाय सुझाए तो कल्पना झा ने धरोहर तालाबों को संरक्षित किए जाने की ओर ध्यान खींचा। संगोष्ठी में रघुवीर मिश्र, अखिलेश कुमार झा, पुतुल प्रियंवदा, प्रवीण कुमार झा, अमित मिश्र, विजय कुमार साह, संजीव कुमार मिश्र, शारदानंद सिंह, रामचंद्र राय, गौरीशंकर मिश्र, साहेब ठाकुर आदि ने भी अपने आलेख प्रस्तुत किए।धन्यवाद ज्ञापन स्वागत महासचिव प्रो जीवकांत मिश्र ने किया। जबकि कार्यक्रम में रामकुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढा भाई, प्रो चंद्र मोहन झा पड़वा, डा रमेश झा, संतोष कुमार झा, गंधर्व कुमार झा, सौरभ नीतिश आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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