सुपौल – हिंदी दिवस सह कवि सम्मेलन का आयोजन

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रिपोर्ट – प्रमोद यादव

सुपौल – जिला मुख्यालय के प्रखंड संसाधन केंद्र परिसर उत्क्रमित मध्य विद्यालय पुनर्वास सुपौल में शनिवार को दिन के 10:00 बजे हिंदी दिवस सह कवि सम्मेलन का आयोजन शिवपुरी सुपौल में आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिलेश झा अपर समाहर्ता सुपौल को प्रमोद कुमार यादव ने पुस्तक कलम से सम्मानित किए। जबकि विशिष्ट अतिथि राजन बालन सहायक निर्देशक आत्मा सुपौल को कलम कॉपी देकर शशांक राज ने सम्मानित किया। श्री अरविंद ठाकुर राष्ट्रीय कवि संगम, संगम के संरक्षक को चंदन कुमार ने कलम कॉपी से संम्मानित किया, रामकृष्ण यादव अमीन को आदित्य हरिनंदन ने संम्मानित किया ।प्रोफेसर लखन प्रसाद को आर0 कुमार ने संम्मानित किया वही तत्पश्चात दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत उद्घाटन की गई ।अखिलेश झा अपर समाहर्ता सुपौल ने कहा हमारी भाषा हिंदी 1000 वर्ष पुरानी भाषा है, हमें इस पर गर्व होनी चाहिए। हिंदी आज जिस रूप में है, हमें काफी गौरवान्वित होना चाहिए।पुराने कवियों ने लिखा है, हिंदी है हम वतन है हिंदुस्तान हमारा,इंग्लिश हमारी मातृभाषा नहीं है ।,पढ़ाई की भाषा है , और जानना भी जरूरी है। बच्चों से आग्रह किया कि हिंदी मातृभाषा को अच्छी से अध्ययन करें और हिंदी शुद्ध शुद्ध बोलेंगे पढ़ाई करेंगे तभी आप अंग्रेजी भी अच्छे से जान सकते हैं। वही श्री राजन बालन सहायक निर्देशक आत्मा सुपौल ने कहा कि हम दक्षिणी भारत से आते हैं, केरल राज्य से और मलयालम भाषा हम नहीं जानते पर बिहार की सभी भाषाएं मैं शुद्ध शुद्ध पढ़ लिख सकता हूं। और हिंदी में कई गीत कविता मेरे द्वारा रचना की गई है ।वहीं अंग्रेजी हिंदी में लोग कई भाषाओं को मिलाकर बोलते हैं। राजन बालन ने सबसे पहले स्वच्छता पर गीत गाए फिर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एवं अंत में बेटी के बिना यह संसार अधूरा है संगीत के माध्यम से लोगो को उत्साहित किया ।उनकी गीत काफी अच्छी लगी विद्यालय के बच्चे उन्हें चाचा नेहरू की तरह मिलते नजर आये। श्री अरविंद ठाकुर राष्ट्रीय कवि संगम के संरक्षक ने कहां की सारी भाषा से अलग करती है । निश्चित रूप से निसंदेह काफी तरक्की की है। हिंदी विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों में हिंदी की मांग होती है। और विश्व के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई होती है। वही रामनरेश कौशकि ने हिंदी में अपनी रचना कविता पढ़कर लोगों को सुनाया। प्रशांत मोहन ने हिंदी पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी सभी भाषाओं की जननी है वह अपनी रचनाएं कविताएं भी लोगों को सुनाएं।

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