दरभंगा – महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के द्वारा विशेष व्याख्यान आयोजित

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रिपोर्ट – अजित कुमार सिंह

दरभंगा / इंडक्शन कार्यक्रम के तीसरे दिन महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के द्वारा विशेष व्याख्यान आयोजित की गई।इस क्रम में संस्कृत,गणित तथा दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित विशेष व्याख्यान में साधनसेवी के रूप में विश्वविद्यालय के पूर्व भू- संपदा पदाधिकारी सह स्नातकोत्तर संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामनाथ सिंह ने कहा कि व्यक्ति की योग्यता विरासत में नहीं मिलती,बल्कि सतत प्रयास से उत्पन्न होती है। हमारा व्यवहार ही हमारे व्यक्तित्व का आईना होता है। प्रभावशाली व्यक्तित्व हेतु सकारात्मक छवि आवश्यक है।व्यक्तित्व का विकास चरित्र से होता है और चरित्र से ही व्यक्ति की पहचान होती है। चरित्र ही आत्मबल का व्यावहारिक रूप है।हमें अपने जीवन के आदर्शों के प्रति ईमानदार रहना चाहिए।चरित्र की पहचान हमारे व्यावहारों से होती है।समाजसेवा से भी व्यक्तित्व का निर्माण होता है।अपवादों को छोड़कर चेहरे से हल्की प्रसन्नता हमेशा दिखनी चाहिए।
द्वितीय सत्र में आरबीएस कॉलेज,अंदौर के संस्कृत शिक्षक डॉ प्रदीप तिवारी ने कहा कि प्रयोग के बिना विद्या नष्ट हो जाती है। हम जो सीखते हैं,उसे अपने आचरण में उतारना जरूरी है। शिक्षा से हमारे नैतिक चरित्र का विकास होता है। ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है। इससे हम इंसान बनकर कर सफलता का हर द्वार खोल सकते हैं।अपनी आत्मशक्ति का आकलन करके तदनुसार श्रम करने से ही हमें सफलता मिलती है। इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ रुद्रकांत अमर,डॉ शशांक शुक्ला,आरती कुमारी,मन्नी कुमारी,अंजली कुमारी,पूजा कुमारी, प्रकाश झा,संतोष कुमार,बाबू साहेब कुमार,रागिनी कुमारी तथा प्रणव कुमार सिंह आदि ने गीत गाया,भाषण दिया एवं अपने विचार भी व्यक्त किया।कार्यक्रम का संचालन तथा अतिथि स्वागत संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ आर एन चौरसिया ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन गणित विभागाध्यक्ष डॉ अनुपम कुमार सिंह ने किया। स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग के तत्त्वावधान में सेमिनार हॉल में स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि के रूप में मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एस एम झा ने संबोधित करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में सफलता के लिए न केवल शिक्षा,बल्कि इच्छाशक्ति, नैतिक मूल्य,उद्यमशीलता तथा नवसृजन की आवश्यकता है,ताकि बाजारवाद के इस दौर में हम अपनी अलग पहचान बना सकें।उनका यह स्पष्ट मत था कि व्यवसाय का उद्देश्य लाभ कमाना तो होना ही चाहिए, लेकिन नैतिक मूल्यों को भी ध्यान रखना चाहिए।इस अवसर पर वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डी पी गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण में वाणिज्य के छात्रों के कर्तव्यों एवं समाज के प्रति उनके उत्तरदायित्वों पर विस्तृत चर्चा की।समारोह में प्रो सी एस मिश्रा, प्रो बी एन मिश्रा,डा बासुदेव साहू, प्रो दिव्या शर्मा एवं प्रो रितिका मौर्य ने भी अपने विचार रखे। डॉ अशोक कुमार पोद्दार ने अतिथि स्वागत तथा कार्यक्रम का संचालन किया।

स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में संसाधन पुरुष के रूप में विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनीश अहमद ने मनोविज्ञान के विकास के क्रम में एक व्यक्ति के रूप में एवं संपूर्ण विश्व में मनोविज्ञान के बढ़ते स्वरूप पर प्रकाश डाला।उन्होंने मनोविज्ञान के बढ़ते अवसर एवं उसके व्यापक क्षेत्र के बारे में छात्रों का मार्गदर्शन किया। दूसरे सत्र में मेंटरिंग विद यूनिवर्सल वैल्यू के अंतर्गत ह्यूमन नीड ग्रिटीट्यूड टूवर्ड्स हेल्पिंग विषय पर छात्र-छात्राओं से परिचर्चा एवं वाद-विवाद विभागीय शिक्षक डॉ एकता श्रीवास्तव तथा डॉ विजय सेन पांडे ने कराया।वहीं तृतीय सत्र में लिटरेरी एक्टिविटी के दौरान छात्रों से स्टोरी राइटिंग कराई गई, जिसमें महाविद्यालय आइक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डा मो जिया हैदर ने रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाई। आखिरी सत्र में क्रिएटिव आर्ट्स एंड कल्चर में छात्रों ने पेंटिंग एवं पोस्टर का निर्माण किया,जिसका मूल्यांकन डॉ पुनीता कुमारी ने किया।पूरे कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नथनी यादव के निर्देशन में किया गया। स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर प्रभाकर पाठक तथा ने विशेष व्याख्यान दिया,जबकि दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ रुद्रकान्त अमर ने भी व्याख्यान दिया।अतिथियों का स्वागत मोमेंटो तथा पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया गया।इस अवसर पर डॉ अवनि रंजन सिंह, प्रो रमन बिहारी लाल, प्रोफेसर शिप्रा सिन्हा, प्रो यादवेंद्र सिंह,डा रीना कुमारी आदि उपस्थित थे ।अंग्रेजी विभाग के द्वारा ‘कला,संस्कृति तथा प्रतिभा खोज’ विषय पर नटराज डांस एकेडमी के निदेशक मोहित खंडेलवाल ने व्याख्यान दिया।उन्होंने गणेश वंदना तथा अन्य मोहक नृत्य प्रस्तुत किया।छात्र-छात्राओं की ओर से कविता,गीत, इण्डोर खेलकूद प्रतियोगिता आदि आयोजित किया।दूसरे सत्र में डॉ शशांक शुक्ला का ‘व्यक्तिगत एवं व्यवसायिक संबंध’ विषय पर व्याख्यान हुआ।कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर मंजू राय,डॉ अमरेंद्र शर्मा, तथा डॉ प्रीति कनोडिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रोफेसर इंदिरा झा ने अतिथियों का स्वागत किया,जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ तनीमा कुमारी ने किया।

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