दरभंगा – ताजिया मिलान मे उमङे लोग खिलाड़ियों ने दिया शांति का पैगाम

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज

ब्यूरो – अजित कुमार सिंह

 

दरभंगा /  मुहर्रम की 9 और 10 तारीख का इसलाम मे बहुत बङा महत्व है। मुस्लिम बहुल समाज मे इस दिन को एक खास दिन के रुप मे मनाया जाता है। इस दिन लोग दान पुण्य भी करते हैं ।मुहर्रम का महिना उर्दु कैलंडर के मुताबिक पहला महिना है चार महिना सबसे खास है जिसमें मुहर्रम का महिना भी आता है । महिने को गम का महिना भी कहा जाता है ।क्योंकि मुहर्रम की 10 वीं तारीख को अल्लाह के अखिरी नबी के नवासे हुसैन की शहादत हुई थी इस लिए यह महिना हुसैन की शहादत का गवाह भी है । महिने की 9 और 10 तारीख को मुस्लिम समाज के लोग रोजा भी रखते हैं हुसैन की याद मे महफिल भी सजाई जाती है । जगहों पर ताजिया का निर्माण होता है जिसमें पारंपरिक हथियारों से खिलाड़ी खेलों का प्रदर्शन करते हैं ।

अखाड़ों का जलूस निकलता है ।इस वर्ष भी पूरी शांतिपूर्वक मंगलवार को क्षेत्र के बहुआरा बुजुर्ग , कनौर , मालपटृी , धरमपुर , मुहम्मदपुर , आदि गावों से मुहर्रम का जलूस निकला जिसमें ताजिया मिलान भी हुआ कई अखाड़ा की ताजिया का मिलान आपस मे हुआ। इस दौरान , या हुसैन – या अली , के नारों से पूरा गूंज उठा आजाद चौक अखाड़ा , पगला अखाड़ा , हिरो अखाड़ा बहुआरा के खिलाड़ियों ने शांतिपूर्वक खेलते हुए भाईचारे की मिशाल पेश की ताजिया मिलान के वक्त ग्रामीण मीर मोo शहनवाज सहित अखाड़ा अध्यक्ष मोo जाकिर , लाडले , मोo नासीर , मो‍० शाहिद , मोo अफजल , मोo सकलैन के अलावा मुहर्रम कमिटी के सभी सदस्यों की पैनी नजर थी क्षेत्र मे निकलने वाले जलूस मे खिलाड़ियों के अलावा महिला , पुरुष , बच्चे , वृद्ध सभी साथ नजर आए अखाड़े पर लगाये गये लाल पीली बत्ती से अखाड़ा नहा उठा कई जगहों पर मेले जैसे दृश्य देखने को मिला अस्थायी रुप से दुकानें भी सजी हुई थी और खरीदारी करने वालों की भीड़ भी खूब देखने को मिली प्रशासन की भी जगह जगह निकलने वाले जलूस पर पैनी नजर थी ।वहीं मुहर्रम कमिटी को शांति समिति के सदस्यों का भी सहयोग मिला खेल को शांतिपूर्वक सफल का आयोजन।

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